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सीपीएम में दरार: करात या येचुरी, किसे मिलेगा समर्थन, वोटिंग से हो सकता है तय

हैदराबाद 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी (सीपीएम) के अंदर गुटबाजी हैदराबाद में चल रहे पार्टी कांग्रेस के दौरान खुलकर देखने को मिली। पार्टी के अंदर महासचिव सीताराम येचुरी और पूर्व महासचिव प्रकाश करात के धड़ों के बीच कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर तनातनी जारी है। गुरुवार को पार्टी कांग्रेस में ड्राफ्ट पॉलिटिकल रेजॉलूशन पर लंबी चर्चा के बाद भी एक राय नहीं बन सकी। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी की राजनीतिक लाइन क्या रहेगी इसे तय करने के लिए वोटिंग का सहारा लिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि जबकि पार्टी की सेंट्रल कमिटी पूर्व महासचिव प्रकाश करात के पक्ष में है, वर्तमान महासचिव सीताराम येचुरी को पार्टी कांग्रेस में भरपूर समर्थन मिला जहां वह पॉलिटिकल रेजॉलूशन पर अपने 'अल्पसंख्यक दृष्टिकोण' को भी प्रस्तुत करने में कामयाब रहे। बता दें कि येचुरी के मत को सेंट्रल कमिटी ने जनवरी में पहले ही खारिज कर दिया था। 

सूत्रों की मानें तो पार्टी कांग्रेस में शामिल 786 प्रतिनिधियों में से करीब 390 से ज्यादा सदस्य येचुरी की लाइन से सहमत नजर आए जो बीजेपी को हराने के लिए धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और यहां तक कि कांग्रेस के साथ आने का 'खुला' दृष्टिकोण रखती है। इस दौरान गुरुवार को पार्टी में गुटबाजी के कयास भी सच होते दिखे जब पश्चिम बंगाल से आए पार्टी प्रतिनिधियों ने येचुरी के समर्थन में सीक्रेट बैलट की मांग की। करात गुट नहीं चाहता कांग्रेस से समझौता 

सीपीएम के पार्टी संविधान में फिलहाल वोटिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया नहीं है। चलन के अनुसार, पार्टी कांग्रेस में वोटिंग दिखाए गए हाथों की संख्या पर आधारित होती थी। हालांकि अंतिम निर्णय 16 सदस्यीय पोलितब्यूरो के हाथ में होता है जहां ऐसा माना जा रहा है कि येचुरी बाजी मार सकते हैं। वहीं करात का गुट, बीजेपी-आरएसएस की सरकारों को हटाने के लिए येचुरी से सहमत तो है लेकिन वह इसके लिए कांग्रेस से समझौता नहीं चाहता है। 

हमारी पहली प्राथमिकता बीजेपी को हराना है- येचुरी 
इस पर येचुरी ने सफाई देते हुए कहा, 'बाहरी समर्थन शब्द से इतर हमारे पास एक बौद्धिक संपदा है। आप अगर हमारे इतिहास को देखेंगे तो पाएंगे कि हम कभी किसी फ्रंट या गठबंधन का हिस्सा नहीं रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'इस बात को लेकर कोई मतभेद नही हैं कि आज प्राथमिकता बीजेपी सरकार को हराना है। इसे हम कैसे प्राप्त करेंगे इस पर लगातार चर्चा की जा रही है। 

 

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